Sunday, 27 November 2022

छोटी हथेली

 हथेलियां छोटी सही

कोशिशें अभी जारी हैं

अंधेरे स्याह गहरे सही 

अब रोशनी की बारी है

पूछकर आते हैं क्यों अपने

औरों के लिए चारदीवारी है

दर्द उभरा पलकें भींग चली

मुस्कुराए होंठ ज्यों लाचारी है

वादा नहीं रुक्का नहीं दावा नहीं 

देखलें बस दिल की बेकरारी है




No comments:

Post a Comment