Tuesday, 20 December 2022

क्षणभंगुर

 क्षणभंगुर


बादल गरजे

बरसने लगा पानी

भींगते गुलाब

मुस्कुराते रहे

उम्मीदों के

सुंदर स्वप्न

संजोते रहे कृषक

विरहिणी नायिका

बारिश में

आँसू छुपाती रही

राहगीर 

भींगने से बचने की कोशिशों में

खुद को

कीमती रत्न सा छुपाकर भी

भींगते रहे

मुस्कुराते रहे

सुखद सुंदर वातावरण

बदल गया मातम में

औचक वज्रपात ने

लील लिया

क्षणांश में ही

कितना कुछ

जीवन आखिर

क्षणभंगुर ही है।


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