Sunday, 7 June 2026

सप्पत किरिया

 सप्पत-किरिया 

सप्पत पर केना भरोस करी,

साँच अपनहि अलगि,

हेल जाइछ,

आबि जाइछ उपर,

तर परि जाइछ फूसि,

सप्पत खेनहार,

नहिएं गछैत छथि,

साँच के,

बिसरि जाइत छथि,

अपन बाँचल-खोंचल,

लाज-धाक के,

थथमारि क राखब,

माला जपैत छथि,

फुसिक,

सप्पत-किरिया खा क,

अनकर आँखि में,

गर्दा झोंकब में,

तेहेन क डुमि जाइ छथि,

जे अपने आँखि,

भ जाइत छन्हि बट्टम।

हुनका लगै छन्हि,

लोक हुनके भरोसे,

बैसल छै,

ओ जेना देखौथिन्ह-सुनौथिन्ह,

तहिना सभ,

देखतै-सुनतै,

कहै छै जे......

एहन कत्तौ होई,

आई तक नहिं बनल,

एहन पर्दा वा चद्दरि,

जे झाँपि सकै,

साँच के,

सप्पत-किरिया के,

कोन मोजर?


सर्वाधिकार बिभा कुमारी

ट्विंकल ट्विंकल लिटल स्टार

 ट्विंकल ट्विंकल लिटल स्टार 


नन्ही आँखों ने

अभी तो

देखना शुरू ही किया था

स्वप्नों ने अभी-अभी उनमें

बिछाई थी

सतरंगी चादर

अभी तो

नन्हे कदम

लम्बी यात्रा के लिए

धरती पर

उतरे ही थे

मासूम हँसी

अभी तो

घर से दुनिया तक को रौशन

करने ही वाली थी

अभी तो

नन्ही कली को खिलकर

बनना था फूल

अपनी सुगंध से

महकाना था संसार

अपने तेज से

मिटानी थी

हर बुराई

अफसोस.....

दरिंदगी ने

खोल दिए जबड़े

और लील लिया

निष्पाप बचपन

इंसानियत शर्मसार 

अपनी बेबसी पर

रुदन-क्रंदन

क्षत-विक्षत

तन-मन

टिमटिमाने से पहले ही

टूट गया तारा 


सर्वाधिकार@ बिभा कुमारी

गलत है यहाँ

 गलत को गलत कहना गलत है यहाँ

रोते को हँसाना गलत है यहाँ

सच बोलने की सज़ा तो मिलनी ही थी

रात को रात कहना गलत है यहाँ

समझदारी की बात करते हैं नासमझ

आँखों से पट्टी हटाना गलत है यहाँ

अहंकार का बोझ उठाए फिर रहे

अहं के गुब्बारे को फोड़ना गलत है यहाँ

इंसानियत से वास्ता अब कोई भी नहीं

इंसान को पहचानना गलत है यहाँ

इंतजार से भला क्यों आने लगें लोग

बिभा पलकें बिछाना गलत है यहाँ।


सर्वाधिकार@ बिभा कुमारी