ट्विंकल ट्विंकल लिटल स्टार
नन्ही आँखों ने
अभी तो
देखना शुरू ही किया था
स्वप्नों ने अभी-अभी उनमें
बिछाई थी
सतरंगी चादर
अभी तो
नन्हे कदम
लम्बी यात्रा के लिए
धरती पर
उतरे ही थे
मासूम हँसी
अभी तो
घर से दुनिया तक को रौशन
करने ही वाली थी
अभी तो
नन्ही कली को खिलकर
बनना था फूल
अपनी सुगंध से
महकाना था संसार
अपने तेज से
मिटानी थी
हर बुराई
अफसोस.....
दरिंदगी ने
खोल दिए जबड़े
और लील लिया
निष्पाप बचपन
इंसानियत शर्मसार
अपनी बेबसी पर
रुदन-क्रंदन
क्षत-विक्षत
तन-मन
टिमटिमाने से पहले ही
टूट गया तारा
सर्वाधिकार@ बिभा कुमारी
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