Wednesday, 10 June 2026

धिया - पुता लादनी

 धिया-पुता लादनी


की कोनो खत्ता-डबरामे

भेटत चूरुक भरि पानि

जाहिमे डुमि क

मरि जाय

हमरा लोकनि

प्रकृति चेतौनी पर चेतौनी

द' रहल अछि

कहि रहल अछि

इह....

मनुक्ख सभ

नहितन

की तोरा

एकसरे टा लेल

केने रही हम

एतेक सरंजाम

करेजी नहि

दलकलौ तोरा सभक

अनानासमे

विस्फोटक द खुएलें

गाभिन हाथिनी

माता केँ

तोहर करनीक

पीड़ा भोगलक

दुनु माय-पूत

ओकर एक

डेगक चांपनमे

कतय जैतौं

हमरा लोकनि

आ कतय

जेइतै

नगरी ठाम

दुस्सह पीड़ा सहि

दम तोरैत

चरितार्थ केलीह-

"छमा बरन को

चाहिए

छोटन को अपराध"

कनैछ पोखरिक

महार

हाकरोश करैछ मेदिनी

एहि महार

पर सँ

जाइत छल

कहियो

दलक-दल हाथी

ओकर भरिगर

डेग सँ

दलमलित होइत

धरतीक थाप पर

नचैत छल

बाल-बृंद

ओह! ओहि

गाभिन माता

ओ भ्रूण हाथीक

छुटैत परान

सँग

नोर बहा रहल

छल

धरती सँ

अकाश धरिक

अणु-परमाणु

कठकरेज मनुक्खटा

अपनहि

दुनियामे

मोन-मतंग

झूमि रहल

छल

हाथियोक

सुरेबगर सुन्नर

उठान सँ बेशी

हमर हृदय क

कोन मे

नुकायल नेना

कनैत अछि

भकर- भकर

गबैत अछि

गर जांति क'-

"हाथी मैया हाथिनी

धिया-पुता लादनी"

ससरी नहि

अलगैछ ओहि

नेनाक जे किछु बाजत

आब

ओकरा सभ सँ बेशी

डर होइत छै

अपनहि प्रजाति सँ

आ कि

दिग-दिगंत

फेरो दमसेइत कहलकै

ईह मनुक्खसभ

नहितन

मोनक कोनमे

नुकायल नेना

मुनि लेलक आँखि

नोरक टघार सँ

भीजि रहल अछि करेजी

गाबि रहल अछि

तरेतर साँसक

बसुली-

"हाथी मैया हाथिनी

धिया-पुता लादनी"

कतय पड़ा जाय

जे नहि किछु

देखय पड़ै

आ नहि सुन'।


सर्वाधिकार@ बिभा कुमारी

No comments:

Post a Comment