Sunday, 7 June 2026

सप्पत किरिया

 सप्पत-किरिया 

सप्पत पर केना भरोस करी,

साँच अपनहि अलगि,

हेल जाइछ,

आबि जाइछ उपर,

तर परि जाइछ फूसि,

सप्पत खेनहार,

नहिएं गछैत छथि,

साँच के,

बिसरि जाइत छथि,

अपन बाँचल-खोंचल,

लाज-धाक के,

थथमारि क राखब,

माला जपैत छथि,

फुसिक,

सप्पत-किरिया खा क,

अनकर आँखि में,

गर्दा झोंकब में,

तेहेन क डुमि जाइ छथि,

जे अपने आँखि,

भ जाइत छन्हि बट्टम।

हुनका लगै छन्हि,

लोक हुनके भरोसे,

बैसल छै,

ओ जेना देखौथिन्ह-सुनौथिन्ह,

तहिना सभ,

देखतै-सुनतै,

कहै छै जे......

एहन कत्तौ होई,

आई तक नहिं बनल,

एहन पर्दा वा चद्दरि,

जे झाँपि सकै,

साँच के,

सप्पत-किरिया के,

कोन मोजर?


सर्वाधिकार बिभा कुमारी

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